UIDAI ने CSC को किया सेवामुक्त, हजारों बेरोज़गार VLE मांग रहे हर्जाना, दोषी कौन?

UIDAI ने CSC को किया सेवामुक्त

सभी आधार केंद्र होंगे बंद

हजारों बेरोज़गार VLE मांग रहे CSC से हर्जाना

इसी हफ्ते, यूआईडीएआई ने सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड को आधिकारिक तौर पर उसके साथ रजिस्ट्रार-समझौते का नवीनीकृत करने से साफ़ इनकार कर दिया है. 6 फरवरी, 2018 के ही पत्र में, उन्होंने आधार सेवाएं प्रदान करने के लिए सीएससी नेटवर्क के तहत केंद्रों के लिए अनुमति प्रदान करने से इनकार कर दिया है. अर्थात अब से CSC का कोई भी VLE कहीं भी आधार की कोई भी सेवा प्रदान नहीं कर सकता.

इसका यह भी अर्थ हुआ कि देश भर में मुख्यरूप से आधार केंद्र ही चलाने वाले हज़ारों VLE बेरोज़गार हो सकते हैं. CSC के भरोसे पर लाखों की डिजिटल मशीनों के उपयोगहीन होने पर अब देशभर के VLE CSC-प्रशासन से मांग रहे हैं हर्ज़ाना. कहते हैं “फिर बहकावे में नहीं आनेवाले” 

सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड से आधार सर्विसेज छीनने  के पीछे यूआईडीएआई ने कारण बताते हुए कहा है कि “सीएससी ई-शासन के तहत आधार नामांकन/अपडेट केन्द्रों के खिलाफ भ्रष्टाचार और नामांकन प्रक्रिया के उल्लंघन की शिकायतों की भारी संख्या है. अतः सीएससी के साथ समझौता ज्ञापन को नवीनीकृत करना संभव नहीं सकता है.”

दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में एक माना जाने वाला CSC नेटवर्क संभवतः सही प्रबंधन व प्रशासन के आभाव में यह दिन देख रहा है जहाँ उस पर भरोसा कर के लाखों युवकों ने  लाखों के क़र्ज़ लेकर भी अपने जीवन-यापन की नैया CSC को सौंप दी और अब बर्बाद होने की क़गार पर हैं.

हालांकि कमीशन-बेस्ड इस नेटवर्क को एक न एक दिन तबाह होना ही था. ऐसे नेटवर्क का अस्तित्व तभी कायम रह सकता था जब इसके प्रशासन से भ्रष्टाचार कोसो दूर रहे और अधिकारी-वर्ग स्वहित साधने से, साथ ही नेटवर्क के अंतिम पायदान तक उनका पूरा हिस्सा समय पर मिले! दुर्भाग्य से CSC नेटवर्क में इन तीनों आधारभूत तथ्यों का काफी आभाव रहा हैं.

यहाँ किन्ही 8-10 राज्य-विशेष के प्रमुखों (State Head) को दोषारोपित नहीं किया जा सकता परन्तु निश्चितरूप से झारखण्ड, यूपी, पंजाब जैसे कुछ राज्य अवश्य हैं जो CSC-प्रमुख (केंद्रीय) को झूठे व बनावटी आकड़ो से भ्रमित करते रहे हो और राज्य-प्रमुख के मातहत CSC-अधिकारीगण अपना महत्वाकांक्षी ‘स्वहित’ साधने में राज्य-प्रमुख का जायज़-नाजायज़ कामों में साथ निभा रहे हों!

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हो जाती है जब ये सरकार को फ़क़त आंकड़ों से खेलाते ही नहीं अपितु इनकी कृपा से अँधेरा व गन्दी गलिओं से त्रस्त ‘कुर्रा’ (बोकारो, झारखण्ड का एक तथाकथित डिजिटल गाँव/पंचायत) जैसे कई गांव पुर्णतः ‘डिजिटल’ बन जाते हैं! ….तो CSC नेटवर्क में पुनर्विचार और रेनोवेशन की आवश्यकता कहाँ है साफ़ समझा जा सकता है.

यह भी सच है कि 11,280 CSC PECs (Permanent Enrollment Centres) के मालिक तथा उन पर आश्रित तमाम कर्मी अब जब बेरोज़गार-ओ-बर्बाद होने की क़गार पर हैं तो व़े किसको दोष देंगे? इनके अधिकारिओं का बे-ईमान(?) निकलना इनको कतई अधिकार नहीं देता की ये आधार आदि CSC अंतर्गत सभी सेवायें प्रदान करने के लिए जनता से मनमानी रक़म तो एईठें भी और काम भी अनमने/मनमाने ठंग से करैं! इनके या ऐसे VLE के आरोप/तर्क कोई मायने नहीं रखते कि “आधार का पैसा महीनों बाद आता है, घर व स्टाफ कैसे चलायें?” या “डिजिटल इंडिया के कार्यक्रमों (PMGDISHA, PMKVY आदि) में सेण्टर-कोड या सेण्टर-अप्रूवल लेने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट मेनेजर’ को हज़ारों खिलाने पड़ते हैं” आदि-आदि!

साफ़ है कि सभी VLE कहीं न कहीं सरकार के नुमाइन्दे हैं और जनकार्य में इन्हें अनैतिकता से बचना होगा वरना आज ‘आधार-केंद्र’ गया है कल को बाकि सर्विसेस भी हाथ से निकल जाएँगी.

 
[ क्या है VLE और CSC प्रबंधन की वास्तविक कार्य-प्रणाली? कौन कितना है, क्यों हैं, किससे है असंतुष्ट? झारखण्ड व बिहार के सभी जिलों में हो रहे सर्वे-रिपोर्ट में आप करेंगे इस कटु-सच का सामना, आंकड़ों व प्रमाणों के साथ! जरुर पढ़िए-शीघ्र प्रकाश्य-‘राष्ट्रीय मुख्यधारा’ की एक्सक्लूसिव-खोजी-रिपोर्ट  “VLE और CSC प्रबंधन” ]

 

खैर…बात सारी यहीं आ के थमती हैं कि CSC नेटवर्क में भ्रष्टाचार की बहुतायत है और वो भी अपादमस्तक. इस नेटवर्क को चलाने में सरकारी पैसा जो भी लग रहा है वो अधिकायत में CSC-अधिकारीयों द्वारा ही वाज़िब-नवाज़िब ख़र्चों में खपा लिया जा रहा है मालूम होता है. अंतिम पायदान की असंतुष्टि साबित करती है कि CSC-प्रबंधन और उसके राज्य व ज़िला स्तरीय अधिकारी चूक गए हैं.

क्या आवश्यक नहीं प्रतीत होता कि अब यदि भारत के इस महान सर्विस-नेटवर्क को बचाना है और उसका वही इस्तेमाल करना है जिसके लिए इसका निर्माण किया गया था तो अपादमस्तक सभी अधिकारीयों के नियोजन/पदस्थापन पर सरकार पुनर्विचार करे?!

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