SBI लॉकर चोरी प्रकरण में SBI अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

SBI लॉकर प्रकरण में आज स्थिति यह है कि पुलिस ने आगे बढ़ कर हसन चिकना, उसकी टीम और यहाँ तक की अधिकतम गहनों की बरामदगी तो की ही, गहनों का TIP (पहचान परेड) भी भुक्तभोगी ग्राहकों के मध्य करा दिया है पर SBI प्रबंधन ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया है. वारदात के बाद बचे हुए गहनों (कथितरूप से चांदी के गहने) और यहाँ तक कि बोरा भर कागज़ात का TIP तक नहीं कराया जो काफी पहले कर देना चाहिए था और प्रमाणित करने वाले भुक्तभोगी ग्राहकों को उनके गहने और कागज़ात सौंप देने चाहिये थे. ये सब तथ्य यहाँ SBI अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध करता है, उन्हें शक के कटघरे में खड़ा करता है.

भुक्तभोगी ग्राहकों को आज तक यह भी नहीं बताया गया है कि उक्त चोरी के बाद आखिर कितने और कौन-कौन से गहने घटना स्थल पर बच गए थे. sbi बचे हुए गहनों का TIP (पहचान परेड) अब तक क्यों नहीं करवा रही है? किसी निजी या सरकारी कानूनी कार्रवाई के तहत बचे हुए गहनों को भुक्तभोगी ग्राहकों को लौटा क्यों नहीं रही? आखिर उन गहनों को sbi किस अधिकार के तहत अपने पास रखी हुई है?

उक्त चोरी के बाद जितने गहने घटना स्थल पर बच गए थे, sbi ने इनकी लिस्टिंग कब और किसकी देखरेख में की? उस लिस्ट तक को पब्लिक (भुक्तभोगी ग्राहकों के मध्य ) क्यों नहीं किया? पुलिस के आने से पहले घटना स्थल पर कितने और कौन-कौन से कर्मचारी व अधिकारी पहुंचे थे? कितने sbi अधिकारी घटना स्थल पर पहले पहुचे थे? अकेले-दुकेले या ग्रुप में?

इसके अलावा अभी वो बचे हुए गहने पुलिस के पास हैं तो किस अधिकार या नियम के तहत हैं? अगर बचे हुए गहने बैंक के पास हैं तो कितने सुरक्षित हैं? घोर लापरवाही के साथ काम कर रहे sbi अधिकारी कैसे साबित कर सकेंगे कि उनमे से बचे हुए गहने बाद में गायब नहीं हो रहे होंगे? या बचे हुए गहने लिस्टिंग से ठीक पहले गायब नहीं हुए होंगे? भुक्तभोगी ग्राहकों के जायदाद, सर्टिफिकेट आदि जरुरी कागजात कहाँ और किस हालत में हैं?

भुक्तभोगी ग्राहकों द्वारा SBI केंद्रीय से लेकर स्थनीय अधिकारियों को बारम्बार लिखे आवेदनों और पत्रों को सिरे से नकार देना और किसी को भी कोई जवाब नहीं देना, काफी अरसे से उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क न करना आदि आदि ऐसे सच है जो SBI प्रबंधन व SBI अधिकारियों की कुत्सित मानसिकता सरेआम उजागर करते हैं.

भुक्तभोगी ग्राहकों को ये तमाम तथ्य और स्थितियां रहस्यमयी लग रही हैं. SBI का बचे हुए गहनों का TIP (पहचान परेड) नहीं करवाना, अरसे से भुक्तभोगी ग्राहकों से कोई संपर्क न साधना तथा अब तक शून्य-कार्रवाई करना SBI-अधिकारियों को संदिग्धता की नज़र से नहीं बचा पा रहा है.

इसके चलते बोकारो SBI एडीएम शाखा के तात्कालीन और वर्तमान सभी कर्मचारी-अधिकारी भी शक के घेरे में हैं और जो SBI के इमेज के लिए अच्छा तो कही से नहीं दीख पड़ता. SBI-अधिकारियों को अपनी पाकिज़गी साबित करने के लिए भुक्तभोगी ग्राहकों को विश्वास में लेना अब आवश्यक हो गया है.

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