साहित्यलोक की गोष्ठी में बुद्धिनाथ झा ने सुनाये मैथिली में रचित महाकाव्य ‘ऊँ महाभारत’ के अंश

बोकारो। चर्चित साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’ की मासिक रचनागोष्ठी बीती शाम वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा के चीरा चास स्थित आवास पर हुई। कवयित्री डाॅ निरुपमा कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित इस रचनागोष्ठी में बुद्विनाथ झा, विजय शंकर मल्लिक ‘सुधापति’, हरिमोहन झा, अमीरी नाथ झा ‘अमर’, अमन कुमार झा, ब्रजेश पांडेय, प्रशांत कुमार दुबे, गंगेश कुमार पाठक आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

प्रशांत कुमार दुबे ने ‘जिंदगी नदी की तरह’, विजय शंकर मल्लिक ने ‘साहित्यलोक एक प्रेरणा’ व ‘लीलसा दीपक’, अमीरी नाथ झा ने ‘कैसा यह चित्कार मच गया’, ब्रजेश पांडेय ने ‘वे आसमां पे धु्रव बन गये’, हरिमोहन झा ने ‘मणिपद्म एक परिचय’, गंगेश कुमार पाठक ने ‘पत्थर फेंका किसी अनजाने ने’, निरुपमा कुमारी ने ‘साथ तेरे हर मौसम सुहाना लगता है…’ सुनाकर सबकी वाहवाही लूटी। गोष्ठी का खास आकर्षण रहा ख्याति प्राप्त साहित्यकार बुद्धिनाथ झा द्वारा मैथिली में रचित महाकाव्य ‘ऊँ महाभारत’ के कुछ अंश को सुनना। श्री झा ने ऊँ महाभारत के कुछ अंश सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन अमन कुमार झा व धन्यवाद ज्ञापन विश्वनाथ झा ने किया।

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