आधी सी हूँ …. पलक

आधी सी हूँ, अधूरी यहाँ मैं

ले चल मुझे वापस, सितारों के जहां  में 

मुझे पता है तू यहीं कहीं है

तेरी रूह के होने का एहसास सा होता है…

मुझे पता है तू मेरी ही रूह के हिस्से सा है

फिर लगता है के ये सब एक किस्से सा है

खो सी गयी हूँ खुद को तलाशने में

घिस सी गयी हूँ खुद को तराशने में

आधी सी हूँ, अधूरी यहाँ में

ले चल मुझे वापस उन सितारों के जहां में…..

 

– पलक

 

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