मिथिला सांस्कृतिक परिषद् ने मनाया कोजागरा उत्सव

बोकारो। मैथिली भाषियों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद् द्वारा रविवार की शाम मिथिलांचल का पारंपरिक ‘कोजागरा उत्सव’ सोल्लास मनाया गया। परिषद् द्वारा संचालित सेक्टर-4ई स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित इस उत्सव का उद्घाटन बीएसएल के महाप्रबंधक व मिथिला सांस्कृतिक परिषद् के अध्यक्ष कुमुद कुमार ठाकुर, उपाध्यक्ष अनिल कुमार, परिषद् के महासचिव राजेन्द्र कुमार, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के संरक्षक रामाधार झा, अध्यक्ष प्रभात कुमार झा, सचिव रवीन्द्र झा, मिथिला महिला समिति की अध्यक्ष अंजु झा ने संयुक्तरुप से किया। स्वागत भाषण करते हुए परिषद् के महासचिव श्री कुमार ने कहा कि परिषद् युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने के लिए परंपरा से जुड़े आयोजन समय-समय पर आयोजित करती है। इसी कड़ी में कोजागरा उत्सव का आयोजन हो रहा है। उन्होंने परिषद् द्वारा इस वर्ष मणिपद्म जयंती पर राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन, शिक्षक दिवस पर विद्यापति शिक्षक सम्मान सहित अन्य गतिविधियों की चर्चा की। परिषद् के अध्यक्ष श्री ठाकुर ने कहा कि मिथिलांचल में आश्विन पूर्णिमा के दिन ‘कोजागरा’ उत्सव मनाया जाता है। इस दिन हर घर में लक्ष्मी पूजा का विधान है और रात्रि जागरण की प्रधानता है। विशेषरुप से नव विवाहित युवकों के यहां कोजागरा उत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। उन्होंने मिथिला की धनी संस्कृति व परंपरा पर प्रकाश डालते हुए इसे अक्षुण्ण बनाये रखने का आह्वान सभी से किया।

इस अवसर पर सुप्रसि़द्ध युवा गायक व परिषद् के सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्देशक अरुण पाठक के संयोजन में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसकी शुरुआत अरुण पाठक ने विद्यापति रचित भगवती वंदना ‘जय-जय भैरवि असुर भयाउनि…’ सुनाकर की। तत्पश्चात उन्होंने स्वागत गीत ‘मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल…’, कोजागरा पर्व की प्रासंगिकता को उजागर करता गीत ‘आई पूर्णिमा उगल ईजोरिया चकमक चमकय चान यौ, मिथिला के पावनि ई कोजागरा बांटू पान मखान यौ…’, ‘देखलहुं अहां के जखने हे यै गाम वाली कनिया….’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारती झा, प्रीति राय व जयंती पाठक ने कोजागरा पर्व पर आधारित गीत ‘बौआ के कोजगरा छै…’ की सुमधुर प्रस्तुति की। शेफाली दुबे ने ‘जेहन किशोरी मोरी तेहन किशोर हे…’, ‘भैया कोजगरा में बाबूजी परसै छथिन मखान….’, सुनीता श्रीवास्तव ने ‘रामजी से पूछे जनकपुर के नारी…’ व ‘मोहि लेलखिन सजनी मोरा मनवां…’ तथा प्रमोद कुमार ने ‘हे यौ पहुना अहां मिथिले मे रहू ना..’ सुनाकर श्रोताओं की प्रशंसा पाई। कार्यक्रम में हारमोनियम पर विश्वनाथ गोस्वामी व ढोलक एवं तबले पर धीरज तिवारी ने अच्छी संगति की। इस अवसर पर आगंतुकों के बीच मिथिलांचल का प्रसिद्ध प्रसाद मखान, पान व मिष्ठान्न वितरण किया गया।

आयोजन की सफलता में राज नन्दन ठाकुर, मेजर भारतेंदु कुमार ठाकुर, कृपा नाथ झा, रोशन कुमार झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर बुद्धिनाथ झा, हरिम¨हन झा, अमरेन्द्र कुमार झा, अमिता झा, माया नन्द झा, सुनील मोहन ठाकुर, शंभु झा, रामबाबू चैधरी, रंजन कुमार कर्ण, मनोज झा, प्रमोद कुमार झा ‘चंदन’, संतोष मिश्र, जीसी चैधरी, गणेश झा, ग¨विन्द कुमार झा, चंद्रकांत मिश्र, विजय कुमार झा, गंगेश कुमार पाठक, उषा झा, नीलू झा, डाॅ राकेश रंजन, अरुण झा, अमरनाथ झा, ममता झा, राज कृष्ण राज, काली कांत मिश्र आदि उपस्थित थे।

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