भर पेट खाना और पेट भर “…….” ही सफलता है तो दोनों जंतुओं में असमानता क्या है?

: पुर्णेन्दु पुष्पेश :

भर पेट खाना और पेट भर “…….”, इससे ज्यादा कोई कुछ करे तो ‘सफलता’; वर्ना दोनों जंतुओं में असमानता क्या है? कुछ की चार बातें सुन लेना, कुछ को चार बातें सुना देना; किसी के लिए नारे लगा देना, किसी के लिए मौन धारण कर लेना; वस्तुतः क्या यही सफलता का पैमाना है?

प्रौढ़ों ने तो अपने जीवन का एक ट्रैक बना लिया है. संभवतः बूढ़े तोते पोस नहीं मानेंगे! पर क्या युवाओं का ट्रैक भी यही है? वे युवा जिनके बच्चे बड़े हो रहे हैं वे भलीभांति महसूस कर सकते हैं कि उनके बच्चे आजकल कितनी तेज़ी से बड़े हो रहे हैं.

संस्कारों की बात नहीं करूँगा यहाँ, क्योंकि आपको जो संस्कार दादा-परदादा से मिले उन्हें तो आपने विकृत कर अपने में समाहित कर लिया। फिर आपके बच्चे ऐसा ही कुछ कर रहे हैं तो आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए। बात कर रहा हूँ मैं उस परेशानी की, जिसमे आप अपना अमूल्य समय अपनी धारणा अपना निर्माण या विघटन नहीं करके उनलोगों के निर्माण में लगा रहे हैं जिन्हें सिर्फ अपने निर्माण अपने भविष्य से मतलब है.

शोर-शराबे से तनिक एक ठहर पैदा कर विचार करें तो साफ़ दीख पड़ता है कि इन पार्टियों के नारे हमारे नारे नहीं हैं, हमारी अपनी चाहतें नहीं है. ये चाहतें हम में जबरन पैदा की जा रही हैं. सभी पार्टियां अपने मतलब की चाहतें हम में ठूंस रही हैं; और हम उनके द्वारा निर्मित मायावी नदी में बहने लग जा रहे हैं. दरअसल हम अपनी असल जरूरतों को याद करने का समय ही नहीं निकाल पा रहे… मेरी चिंता का विषय यह है!

अपने सपने की नई दुनिया का निर्माण नहीं किया, उसके निर्माण में एक जरा कामयाब पहल नहीं की, तो मैं काहे का स्वप्न द्रष्टा? कुछ ऐसी ही स्थिति मुझे आज के अपने युवाओं की दिख पड़ती है. दूसरे के तालाब में तैर रहे हैं, खुश हैं, बहुतखुश हैं….मानो यहीं उन्हें मोक्ष प्राप्त होने वाला है!

और इन युवाओं के बाद की पीढ़ी तो इंटरनेट और मोबाईल के हवाले से एक काल्पनिक लोक में हैं फ़िलहाल, पर हालिया युवा कब सोचता हैं कि उनके बच्चे जिस दिन भी वास्तविक दुनिया में कदम रखेंगे तों….! दूसरों के पीछे भागते फिरने की हमारी यह नई प्रवृति हमारी अकर्मण्यता साबित हो रही है; इसका बोध हमे जितनी जल्दी हो जाए, उतना भला है, अपना भला है, अपनों का भला है, अपने क्षेत्र का भला है, अपने राज्य का भला है और देश का भला है!

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