घोषणाएँ मूर्त्तरूप भी लें….

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश 

घोषणाएँ मूर्त्तरूप भी लें….

भारत में हर साल रोजगार की कतार में लोग जुड़ते जा रहे हैं। वहीं रोजगार का औसत घटता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएलओ) के अनुसार भारत में बेरोजगारों की संख्या इस वर्ष के अंत तक एक करोड़ छियासी लाख हो जाने का अनुमान है। जबकि आउटलुक के एक सर्वे के अनुसार भारत में इस साल बेराजगारों की संख्या में तीस लाख की बढ़ोत्तरी होगी। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यंत्री ने संसद में इन आंकड़ो को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि भारत सरकार ने 2016 से देश में रोजगार के वास्तविक आंकड़ों का कोई सर्वे नहीं कराया है।
सर्वे नहीं करा कर या सही आंकड़े उपलब्ध नहीं करा कर सरकारें सवाल का जवाब देने से तो बच सकती हैं, लेकिन इन सवालों से पीछा नहीं छुड़ा सकतीं। आज पूरे देश में बेरोजगारी का जो आलम है, वह मंदी और छटनी के बाद और भयावह है।

आईएलओ के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे ज्यादा बेरोजगारों वाला देश बन गया है। यहां ग्यारह प्रतिशत आबादी अर्थात् करीब 12 करोड़ लोग बेरोजगार हैं और बेरोजगारी दूर करने में कोई भी योजनाएं सफल साबित नहीं हो पा रही हैं।

झारखंड की स्थिति भी इन आंकड़ों से कुछ ज्यादा भिन्न नहीं है। यहां इस कारण भी पलायन बदस्तूर जारी है। और देश के अन्य क्षेत्रों में इन्हें ना तो सही रोजगार मिल पा रहा है और ना ही उचित सम्मान। इस बेरोजगारी के लिए भी सरकारें पहले और उससे भी पहले की सरकारों पर आरोप लगा कर स्वयं को तात्कालिक रूप से मुक्त तो कर लेती हैं लेकिन रोजगार देने और रोजगार का सृजन करने के नाम पर हर सरकार हतोत्साहित ही करती रही है। इसके बारे में मामला बाहरी-भीतरी का भी हो जाता है।

इसी क्रम में पिछले दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि 18 हजार शिक्षकों की बहाली होगी। तथा एक अन्य घोषणा के अनुसार एक लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा।

बोरियो से आये एक युवक से रोजगार की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप को हुनरमंद बनाया जाएगा। 700 करोड़ रुपये युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है आप उपायुक्त से मिलें और प्रशिक्षण प्राप्त करें। समय की मांग के अनुरूप आपको प्रशिक्षित किया जा सके। 12 जनवरी 2019 को राज्य सरकार 1 लाख युवाओं को रोजगार से आच्छादित करेगी।

घोषणाएं तो होती रही हैं और एक यह भी हो गई। हां, इसमें एक सुखद अहसास तो है कि कम से कम इतने लोगों को रोजगार नसीब तो हो पाएगा। लेकिन, चिंता यह भी है कि इसके पीछे भी कोई राजनीति ना हो जाए और फिर इस पर भी स्थगन आदेश ना लाना पड़े।

वैसे उमीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकार रोजगार देने में कामयाब होगी और बेरोजगार लोग अपना उल्लू सीधा करने वालों के बहकावे में नहीं आएंगे। यदि ऐसा संभव हो पाता है तो शासन और सरकार के प्रति लोगों का सम्मान बढ़ेगा और झारखंड से कुछ तो पलायान रूकेगा वह अलग।

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