गोमिया उपचुनाव में जनमानस धन पर ढल गया क्या?

अब इसे मन का लालच कहें, धन का प्रभाव कहा जाय या एक नए चेहरे को मौका देकर उससे उम्मीदें जगाना…पर गोमिया उपचुनाव में चुनाव के ठीक एक दिन पहले जनमानस का बहाव एक तरफ़ा महसूस किया जा रहा है. तो क्या’ गोमिया उपचुनाव में जनमानस धन पर ढल गया?

कल ही प्रशासन ने गोमिया के एक स्थानीय होटल में छापा मारकर पैसों सहित लोगों को पकड़ा. इस गाड़ी में उस गाड़ी में यहाँ-यहाँ से इतने-इतने पैसे चले हैं…वहां-वहां के लिए……जैसी पुष्ट-अपुष्ट ख़बरें तो लगातार आ ही रही हैं. और ये हरेक खबर सच हो न हो तो भी क्या, होटल में बांटते हुए रुपयों का पकड़ा जाना यह सिद्ध नहीं करता कि इस चुनाव में पैसों का खेल खुल कर खेला जा रहा है?

खैर, गोमिया का जनमानस कुछ भी निर्णय लेने से पहले यह तो सोच रखा ही होगा कि चुनाव में वो जिसे भी जिताएगा, उसका फल उसी को मिलेगा, अगले चुनावों तक यही विधायक उन्हें खुश रखेगा या झेलायेगा. क्षणिक लाभ के लिए गोमिया की जनता क्या अपने नए भविष्य को भी दाव पर लगा देने का मन बना रही है?

गोमिया की जनता यह भी समझ रही होगी कि अपने आर्थिक लाभ के लिए उनके मोहल्ला-प्रतिनिधि जैसे छुटभय्या नेतागण उनको ही इन उम्मीदवारों को बेच दे रहे होंगे; क्योंकि बाद में झेलना तो इसी जनता को है छुटभय्या का क्या बिगड़ रहा है?

कहने को तो बहुत कुछ है पर अब समय इतना ही रह गया है कि गोमिया की जनता स्टेज पर जाय और दिल से दिमाग से और प्रजेंस ऑफ माइंड से परफोर्म करे. कहा गया है कि “हमने आज तक जो किया, वही हमारा वर्तमान है और आज जो हम करेंगे वही हमारा भविष्य होगा!” तो गोमिया की जनता कल वोट तो जरूर दें पर वो किस हितकारी झोली में ये वोट जायेगा इसका निर्णय धनलोलुपता में न लें.

गोमिया की जनता को स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाओं  के साथ……………

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