समाजिक विसंगतियों और आडम्बरों पर तीखा प्रहार कर गया नाटक विठ्ठला

बोकारो :: गत 8 जुलाई रविवार की रात स्थानीय वेलफेयर सेंटर सभागार में सांस्कृतिक संस्था धरोहर ने नाटक विठ्ठला का जीवंत मंचन किया। विजय तेन्दुलकर द्वारा लिखित एवं संजय कुमार द्वारा निर्देशित नाटक विठ्ठला के माध्यम से कलाकारों ने धर्म की आड़ में पाखण्ड व ढ़ोंग एवं सामाजिक कुरितियों पर प्रहार किया गया है। यह प्रहार उस मनोदशा पर है जो अतिमहत्वकांक्षा का शिकार बनकर जीवन भर हाय हाय भागदौड़ में लगे रहते हैं।

विठ्ठला एक मराठी नाटक है। विठ्ठल आमतौर पर भगवान विष्णु या कृष्ण की अभिव्यक्ति माना जाता है, जिसकी पूजा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गोवा तथा आंध्र प्रदेश में होती है।

नाटक का कथासार
प्रस्तुत नाटक में भिक्षुकी का धंधा करनेवाला विठ्ठल जोशी एक गरीब ब्राह्मण, जिसे भरी जवानी में ही धनवान निपुत्री विधवा से प्रेम करने के कारण मार दिया जाता है और उसके मरने के साथ ही उसकी सारी अभिलाषा महत्वकांक्षा वासनाएं भी मर जाती है जिसे वह भुत बनकर विठ्ठल भगवान का भक्त नामा नामक गरीब दर्जी के द्वारा पुरा करना चाहता है। नामा की गरीबी दुर करने के लिये वह तरह तरह के चमत्कार करता है जिसे ग्रामिण लोग भ्रम में आ जाते हैं कि नामा दर्जी पर विठ्ठल भगवान प्रसन्न है, नामा ईश्वर के साथ साक्षात संवाद करते हैं। नामा को संत नामदेव बना दिया जाता है। नामा की इस भ्रमित दैवी कृपा से तुम्बाजी महाराज अपने अध्यात्म का व्यापार को खतरे मे पाकर एक चाल खेलता है और नामा को ही अपना गुरू मानकर नामा से गावं गाव्र में किर्तन चमत्कार करवाना शुरू कर देता है और रूप्या कमाना शुरू कर देता है। नामा की पत्नि को यह धंधा बहुत ही अच्छा लगता है और कमाए हुए रूप्ये से अब निवेश के बारे में योजनाएं बनाने लगती है। अपनी लोकप्रियता से नामा अहंकारी बन जाता है और भुत के समझाने पर भी नहीं मानता। अन्ततः तुम्बाजी महाराज का मन इस कदर बढ़ जाता है कि वह अपने चेले जटाउ के द्वारा विठ्ठल भगवान का ढोंग कराते हुए कुछ जागरूक ग्रामिणों के द्वारा पकड़ा जाता है और सन्तपन का भांडाफोड़ हो जाता है। नामा और उसकी पत्नि को सादगी से जीवन जीने की समझ आ जाती है। विठ्ठल जोशी का भूत भी चला जाता है।


किरदार निभाने वाले कलाकार
भूत के बेहतरीन किरदार को मनोज कुमार दास व नामा की भूमिका को विक्रांत पासवान, पत्नि की भूमिका में लक्ष्मी कुमारी, तुम्बाजी के रोल म प्रदीप कुमार, जटाउ के भूमिका में मो0 समीर, गावकारी के रोल में मिताली बोस, ग्रामिणों के रोल में संतोष कुमार, श्याम कृष्ण, सुजित कुमार, व उमित गोराय, ग्रामिण औरतों की भमिका में निधी कुमारी, पुष्पा कुमारी, पूजा कुमारी, वैष्णवी जैसे स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर दर्शकों से खूब तालियां बटोरी। सहायक निदेशक पिंकी, संगीत व रूप सज्जा में मृत्युंजय भौमिक, प्रकाश परिकल्पना में गोरांगो, वस्त्र सज्जा में कृति कुमारी, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नाटक के मंचन में रूपन्द्र ना0 सिंह, रण विजय तिवारी, पूनम, विनोद सिंह, राम कुमार, महेंद्र सिन्हा, अजय सिंह, अरूण कुमार, कंचन, मंजू कुमारी की भूमिका रही.

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