यहाँ 7 वर्षों में भी नही सौंपा गया पंचायत सचिवालय व आगंनबाडी भवन

यहाँ आज तक नही सौंपा गया है जारंगडीह उत्तरी पंचायत का पंचायत सचिवालय व जारंगडीह दक्षिणी पंचायत का आगंनबाडी भवन

आंगनबाडी केन्द्र का भवन बनाने मे 1वर्ष से ऊपर की अवधि तो जारंगडीह पंचायत सचिवालय निर्माण मे लगभग 6-7वर्ष के लम्बी अवधि मे भी पूर्ण नही

….बेरमो सीडीपीओ अपना पल्ला झाडती है

…..और बेरमो बीडीओ साहब ‘अननोन नंबर’ कभी नहीं उठाते!

बेरमो – जारंगडीह उत्तरी पंचायत व दक्षिणी पंचायत मे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही देखनी हो तो आज भी सहजता के साथ देखा जा सकता है. अगर जारंगडीह उत्तरी पंचायत का बात सर्वप्रथम की जाय तो विभागीय अधिकारीयो की लापरवाही व पंचायत के विकास मे कई सवाल उठ सकते है. दरअसल जारंगडीह उत्तरी पंचायत का पंचायत सचिवालय, जहां बीते लगभग 6-7वर्ष से पंचायत सचिवालय का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन आज तक उक्त निर्माण पूर्ण नही हुआ है.

मामला चाहे जो भी हो लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही साफ-साफ झलक रही है. अब बिना पंचायत सचिवालय के पंचायत का विकास कितना हो सकता है यह बताने की आवश्यकता नही रह जाती है. वहीं इस सन्दर्भ मे पंचायत के मुखिया इम्तीयाज अंसारी का साफ-साफ कहना है कि संवेदक अपनी मनमानी लगातार कर रहा है. जब भी दूरभाष पर बात होती है तो अपने आप किसी की शादी तो किसी अन्य कार्य व्यस्त बताकर मामला टाल देते हे.

इस मामले को लेकर बेरमो प्रमुख गिरिजा देवी भी जिला के बैठक मे मामला उठा चुकी है. उनकी पहल पर ही पंचायत सचिवालय का रूका हुआ कार्य आरम्भ हुआ था लेकिन अब तक पूर्ण निर्माण कराकर पंचायत सचिवालय पंचायत को नही सौंपा जाने से साफ पता चलता है कि संवेदक विभागीय अधिकारीयो से सांठ-गांठ कर के अपनी मनमानी कर रहा है.

वहीं जारंगडीह दक्षिणी पंचायत का आगंनबाडी केन्द्र संख्या 244 का भवन निर्माण आज तक पुरा कर सौपा नही गया है. भवन के अभाव मे एक ही कमरा मे संचालित हो रहा यह आगंनबाडी केन्द्र एक घुटन भरा कक्ष है जहाँ पर बच्चो के लिए भोजन भी पकाया जा रहा है और जहाँ  अबोध बच्चों की भीड़ में थोडी सी चुक एक बडी दुर्घटना का कारण बन सकती है.

ज्ञात हो कि उक्त केन्द्र निर्माण से पूर्व ही विवाद के घेरो मे रहा है और आज तक मामला विवादस्पद है. इस आगंनबाडी केन्द्र सेविका संगीता श्रीवास्तव का कहना  है कि उक्त केंद्र के निर्माण सम्बंधित जानकारी मुझे नही दी जाती है और बीते वर्षो विरोध करने पर मै विवादो मे घिर गई थी. मुझे केन्द्र संचालन करना है विवादो मे नही रहना है अतः सब समय पर छोड़ दिया है. अब पता नही केन्द्र कब सौंपा जायेगा ये मुझे नही मुखिया को मालुम होगा.

वहीं इस संर्दभ मे बेरमो सीडीपीओ अर्चना सिंह दुरभाष पर अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि उक्त केन्द्र का मामला विवादस्पद है और उक्त मामला का समाधान  जिला से ही किया जा सकता है.

पंचायत भवन के मामले को लेकर बेरमो बीडीओ से बात करने के लिए दूरभाष पर कई बार सम्पर्क साधने की कोशिश की गई पर शायद बीडीओ साहब ‘अननोन नंबर’ कभी नहीं उठाते! सर्वविदित है कि इससे पूर्व भी कई समस्याओं को लेकर कई लोगों द्वारा इन श्रीमान बीडीओ से सम्पर्क की कोशिश ऐसे ही बेकार गई है.

विडम्बना है कि प्रदेश मे बैठे रघुवार सरकार लगातार अधिकारियो को निर्देश देते आ रहे है कि पत्रकारो व आम जनता के साथ मैत्रिय सम्बंध कायम करे वहीं दुसरी तरफ ऐसा देखा जा रहा है कि बेरमो बीडीओ जैसे छोटे अधिकारी भी सरकारी फरमान की धज्जियाँ उड़ना ही अपनी शान समझते है. 

खैर मुद्दा यहाँ यह है कि ऐसे ही अधिकारियों की शह पर उक्त संवेदक समझने लगे हैं कि उनका कोई क्या बिगड़ लेगा, वर्ना क्या कारण है कि 6-7 वर्षों से भवन निर्मित कर के सौंपा नहीं जाता है और कोई सरकारी अधिकारी आज तक कोई कार्रवाई नहीं करता, कोई सवाल तलब नहीं करता? ऐसे में राज्य सरकार को मामला संज्ञान में नहीं लेना चाहिए?

-दीपंकर डे

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