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‘झारखंडी नगाड़ा’ के बोकारो कार्यालय का बोकारो विधायक विरंची नारायण ने किया उद्घाटन

बोकारो :: आज दिनांक 15.01.2020 को स्थानीय सिटी सेन्टर के प्लाॅट संख्या एचबी-5 में साप्ताहिक अखबार ‘झारखंडी नगाड़ा’ के नए कार्यालय का उद्घाटन बोकारो विधायक विरंची नारायण के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।अवसर पर अखबार के समाचार संपादक राजेश कुमार वर्मा तथा महाप्रबंधक रंजीत सिंह चौधरी संग अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। उक्त अवसर पर ‘झारखंडी नगाड़ा’ के प्रकाशक-संपादक पूर्णेन्दु पुष्पेश ने बताया कि बोकारो जिला में एक अदद कार्यालय की अत्यंत आवश्यकता थी। कहा कि ‘झारखंडी नगाड़ा’ मूलरूप से स्थानीय मुद्दों व स्थानीय संस्कृति को प्रमुखता देता है। उद्घाटनकर्त्ता बोकारो…

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बहुत कठीन है डगर पनघट की

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश  जिन पांच राज्यों में चुनाव हुए उनको लेकर ढेरो आशंकाएं भी। सबों के अपने दावे भी। ढेर सारी राजनीतिक विकृतियां भी इस बहाने सामने आ गईं। राफेल सौदे से लेकर सीबीआई आदि के मामलों को लेकर कीचड़ उछालने की कोशिशें भी हुई तो धर्म आदि पर भी लंबी-लंबी छोड़ते पाए गए लोग। हनुमान जी का जाति प्रमाण-पत्र भी सामने आया। इस सबके बाद भी कई असंतोष भी सामने आए जिसने ‘पंद्रह साल – पंद्रह साल’ की रट वाली तख़्त को ही पलट दिया। कांग्रेस के नेतृत्व…

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घोषणाएँ मूर्त्तरूप भी लें….

सम्पादकीय : पूर्णेन्दु पुष्पेश  घोषणाएँ मूर्त्तरूप भी लें…. भारत में हर साल रोजगार की कतार में लोग जुड़ते जा रहे हैं। वहीं रोजगार का औसत घटता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएलओ) के अनुसार भारत में बेरोजगारों की संख्या इस वर्ष के अंत तक एक करोड़ छियासी लाख हो जाने का अनुमान है। जबकि आउटलुक के एक सर्वे के अनुसार भारत में इस साल बेराजगारों की संख्या में तीस लाख की बढ़ोत्तरी होगी। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यंत्री ने संसद में इन आंकड़ो को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब…

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मुश्किल दौर में विपक्ष

राजनीति में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं होता या कि कहिए कि जैसा दिखता है ठीक वैसा ही नहीं होता। इसी का परिणाम होता है कि कई बार इस राजनीति का ठीक-ठीक आकलन कर पाना संभव नहीं होता। या फिर आकलन कुछ कहता है और नतीजा कुछ और ही सामने आता है। कई बार वंशवाद के ठप्पें के कारण अपेक्षाकृत कम उपलब्धियों या बिना उपलब्धियों के भी कुछ लोग शीर्ष पर होते हैं तो कुछ जड़ों से जुड़े होने और अथक परिश्रम के बावजूद वहां तक नहीं पहुंच पाते जैसी कि…

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बहिस्कार तो मीडिया ने कभी सीखा ही नहीं

जौ के साथ घुन का पिस जाना एक चर्चित मुहावरा है। …झारखंड स्थापना पर्व के सुअवसर पर पारा शिक्षकों के साथ ही पत्रकारों के साथ जो कुछ भी हुआ, इस मुहावरे को चरितार्थ करता दिखा। पारा शिक्षकों के विरोध के तौर तरीके को गलत बताते हुए सरकार ने उनपर पत्थरबाजी का भी आरोप लगाया है। लेकिन साथ ही मीडियाकर्मियों पर हुए हमले से समझा जा सकता है कि उस दौरान सरकार कितना असहज महसूस कर रही थी। चूंकि मीडियाकर्मियों के कैमरे छीने और तोड़े गए या ‘डिलीट’ कर दिए गए,…

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खानापूर्ती अधिकारी बनने को मज़बूर क्यों हैं ये प्रशासनिक अधिकारी झारखण्ड में

झारखण्ड राज्य के खानापूर्ती अधिकारी! जी हाँ, ये वैसे अधिकारी होते हैं जिन्हें अपने बचाव का सबसे अच्छा रास्ता यही सूझता है कि कागज़ी तौर पे मज़बूत रहा जाय और आंकड़ों में साहब बहुत ही मेहनती और सफल प्रशासक साबित हो जाएं। भले जमीन पर कागज़ों पे उकेरे अक्षरों का प्रतिबिम्ब भी परिलक्षित ना हो! ये बस खानापूर्ति करके अपना प्रोफाइल रिच करने में लगे रहते हैं। स्वार्थ में दूसरों की लुटिया डुबो देने के चलन से इंकार नहीं किया जा सकता पर ‘जिम्मेदारी’ शब्द से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बाकी तफ़्सील…

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भर पेट खाना और पेट भर “…….” ही सफलता है तो दोनों जंतुओं में असमानता क्या है?

: पुर्णेन्दु पुष्पेश : भर पेट खाना और पेट भर “…….”, इससे ज्यादा कोई कुछ करे तो ‘सफलता’; वर्ना दोनों जंतुओं में असमानता क्या है? कुछ की चार बातें सुन लेना, कुछ को चार बातें सुना देना; किसी के लिए नारे लगा देना, किसी के लिए मौन धारण कर लेना; वस्तुतः क्या यही सफलता का पैमाना है? प्रौढ़ों ने तो अपने जीवन का एक ट्रैक बना लिया है. संभवतः बूढ़े तोते पोस नहीं मानेंगे! पर क्या युवाओं का ट्रैक भी यही है? वे युवा जिनके बच्चे बड़े हो रहे हैं वे…

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आज झारखण्ड भाजपा के आत्मविश्लेषण का दिन है

अतिश्योक्ति नहीं गर कहा जाये कि आज झारखण्ड भाजपा के आत्मविश्लेषण का दिन है. झारखण्ड भाजपा कभी भी झारखंडी-भाजपा बन पाई ही नहीं लगता है. सिंहासन पर गद्दीनसीन होने के बाद अगर किसी राज्य में भाजपा का मिजाज़ बेकाबू हुआ है तो वो है झारखण्ड. स्थानीय सरकार ने कहीं न कहीं जनता के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं से भी मुहँ मोड़ लिया था ऐसा ही प्रतीत होता है.  पूरे भारत में चुनाव के वक़्त प्रधानमंत्री जहाँ-जहाँ गए भाजपा को अच्छा रिजल्ट प्राप्त होता रहा है. परन्तु फेल होने की स्थिति तभी बनती है जब स्थानीय…

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महत्वकांक्षा के आवेग में लंबोदर महतो का बेसिरपैर बयान आया सामने

गोमिया उपचुनाव से सम्बद्ध आजसू प्रत्याशी लम्बोदर महतो अपना स्वहित व अपनी महत्वाकांक्षा के आवेग में इस कदर बह रहे हैं कि उनकी बातें अब जनता की समझ का दायरा तोड़ कर कल्पनाजगत और दिवास्वप्नलोक तक उफन रही हैं. कल रात एक स्थानीय अखबार को वीडियो-साक्षत्कार देते हुए लम्बोदर महतो ने हास्यस्पद सी कई बातें कहीं जो जनता पचा नहीं पा रही है. मसलन उनका कहना है कि प्रथम स्थान तो लम्बोदर महतो के लिए सुरक्षित है, बीजेपी और झामुमो तो सेकेण्ड पोजीसन के लिए मुकाबला कर रहे हैं. जैसे अन्य…

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गोमिया उपचुनाव में NDA का गेम, तीन प्रत्याशियों के साथ उतरी रण में

अरे वाह, यहाँ तो गेम हो गया!! “जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे, तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे…” के तर्ज़ पर NDA ने गोमिया उपचुनाव में जनता के साथ एक गेम खेला है जिससे उसने एक तीर से तीन निशाने साधे हैं. अगड़ी/बाहरी/मगह/शहरी आदि जाति नाम से जाने जाने वाले लोगों को लुभाने के लिए बीजेपी बैनर से माधव लाल सिंह कुर्मी/कुम्हार महतो समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए आजसू बैनर से डॉ लम्बोदर महतो मुस्लिम समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी…

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