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खानापूर्ती अधिकारी बनने को मज़बूर क्यों हैं ये प्रशासनिक अधिकारी झारखण्ड में

झारखण्ड राज्य के खानापूर्ती अधिकारी! जी हाँ, ये वैसे अधिकारी होते हैं जिन्हें अपने बचाव का सबसे अच्छा रास्ता यही सूझता है कि कागज़ी तौर पे मज़बूत रहा जाय और आंकड़ों में साहब बहुत ही मेहनती और सफल प्रशासक साबित हो जाएं। भले जमीन पर कागज़ों पे उकेरे अक्षरों का प्रतिबिम्ब भी परिलक्षित ना हो! ये बस खानापूर्ति करके अपना प्रोफाइल रिच करने में लगे रहते हैं। स्वार्थ में दूसरों की लुटिया डुबो देने के चलन से इंकार नहीं किया जा सकता पर ‘जिम्मेदारी’ शब्द से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बाकी तफ़्सील…

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भर पेट खाना और पेट भर “…….” ही सफलता है तो दोनों जंतुओं में असमानता क्या है?

: पुर्णेन्दु पुष्पेश : भर पेट खाना और पेट भर “…….”, इससे ज्यादा कोई कुछ करे तो ‘सफलता’; वर्ना दोनों जंतुओं में असमानता क्या है? कुछ की चार बातें सुन लेना, कुछ को चार बातें सुना देना; किसी के लिए नारे लगा देना, किसी के लिए मौन धारण कर लेना; वस्तुतः क्या यही सफलता का पैमाना है? प्रौढ़ों ने तो अपने जीवन का एक ट्रैक बना लिया है. संभवतः बूढ़े तोते पोस नहीं मानेंगे! पर क्या युवाओं का ट्रैक भी यही है? वे युवा जिनके बच्चे बड़े हो रहे हैं वे…

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अपने प्रिय मित्रों से विनम्र अनुरोध

अपने प्रिय मित्रों से विनम्र अनुरोध  आपका प्रिय मीडिया संस्थान ‘राष्ट्रीय मुख्यधारा’ आपको लगातार झारखण्ड के सभी जिलों की लोकल ख़बरों से अवगत करता रहता है. न्यूज़ पोर्टल को अबाधित रूप से चलाने में आप सब का दोस्ताना सहयोग हमारे लिए अमूल्य है. आपसे मित्रवत अनुरोध है कि ‘राष्ट्रीय मुख्यधारा’ के इस पोर्टल तथा ‘राष्ट्रीय मुख्यधारा’ के निम्न्लिखित लिंक को सबस्क्राइब कर हमे आपका सहयोग प्रदान करें…. http://www.youtube.com/c/RMNEWSTVCHANNEL

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आज झारखण्ड भाजपा के आत्मविश्लेषण का दिन है

अतिश्योक्ति नहीं गर कहा जाये कि आज झारखण्ड भाजपा के आत्मविश्लेषण का दिन है. झारखण्ड भाजपा कभी भी झारखंडी-भाजपा बन पाई ही नहीं लगता है. सिंहासन पर गद्दीनसीन होने के बाद अगर किसी राज्य में भाजपा का मिजाज़ बेकाबू हुआ है तो वो है झारखण्ड. स्थानीय सरकार ने कहीं न कहीं जनता के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं से भी मुहँ मोड़ लिया था ऐसा ही प्रतीत होता है.  पूरे भारत में चुनाव के वक़्त प्रधानमंत्री जहाँ-जहाँ गए भाजपा को अच्छा रिजल्ट प्राप्त होता रहा है. परन्तु फेल होने की स्थिति तभी बनती है जब स्थानीय…

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SBI लॉकर चोरी प्रकरण में SBI अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

SBI लॉकर प्रकरण में आज स्थिति यह है कि पुलिस ने आगे बढ़ कर हसन चिकना, उसकी टीम और यहाँ तक की अधिकतम गहनों की बरामदगी तो की ही, गहनों का TIP (पहचान परेड) भी भुक्तभोगी ग्राहकों के मध्य करा दिया है पर SBI प्रबंधन ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया है. वारदात के बाद बचे हुए गहनों (कथितरूप से चांदी के गहने) और यहाँ तक कि बोरा भर कागज़ात का TIP तक नहीं कराया जो काफी पहले कर देना चाहिए था और प्रमाणित करने वाले भुक्तभोगी ग्राहकों को…

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गोमिया उपचुनाव में जनमानस धन पर ढल गया क्या?

अब इसे मन का लालच कहें, धन का प्रभाव कहा जाय या एक नए चेहरे को मौका देकर उससे उम्मीदें जगाना…पर गोमिया उपचुनाव में चुनाव के ठीक एक दिन पहले जनमानस का बहाव एक तरफ़ा महसूस किया जा रहा है. तो क्या’ गोमिया उपचुनाव में जनमानस धन पर ढल गया? कल ही प्रशासन ने गोमिया के एक स्थानीय होटल में छापा मारकर पैसों सहित लोगों को पकड़ा. इस गाड़ी में उस गाड़ी में यहाँ-यहाँ से इतने-इतने पैसे चले हैं…वहां-वहां के लिए……जैसी पुष्ट-अपुष्ट ख़बरें तो लगातार आ ही रही हैं. और ये…

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महत्वकांक्षा के आवेग में लंबोदर महतो का बेसिरपैर बयान आया सामने

गोमिया उपचुनाव से सम्बद्ध आजसू प्रत्याशी लम्बोदर महतो अपना स्वहित व अपनी महत्वाकांक्षा के आवेग में इस कदर बह रहे हैं कि उनकी बातें अब जनता की समझ का दायरा तोड़ कर कल्पनाजगत और दिवास्वप्नलोक तक उफन रही हैं. कल रात एक स्थानीय अखबार को वीडियो-साक्षत्कार देते हुए लम्बोदर महतो ने हास्यस्पद सी कई बातें कहीं जो जनता पचा नहीं पा रही है. मसलन उनका कहना है कि प्रथम स्थान तो लम्बोदर महतो के लिए सुरक्षित है, बीजेपी और झामुमो तो सेकेण्ड पोजीसन के लिए मुकाबला कर रहे हैं. जैसे अन्य…

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गोमिया उपचुनाव में NDA का गेम, तीन प्रत्याशियों के साथ उतरी रण में

अरे वाह, यहाँ तो गेम हो गया!! “जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे, तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे…” के तर्ज़ पर NDA ने गोमिया उपचुनाव में जनता के साथ एक गेम खेला है जिससे उसने एक तीर से तीन निशाने साधे हैं. अगड़ी/बाहरी/मगह/शहरी आदि जाति नाम से जाने जाने वाले लोगों को लुभाने के लिए बीजेपी बैनर से माधव लाल सिंह कुर्मी/कुम्हार महतो समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए आजसू बैनर से डॉ लम्बोदर महतो मुस्लिम समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी…

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हमें किसी विदेशी भौतिकवादी मार्क्स, लेनीन या माओ की जरूरत ही क्या?

: गिरिधारी गोस्वामी : धर्म के नाम पर पशुओं के बलि दिये जाने पर सवाल पर आज भी पूरोहित द्वारा यही जबाब दिया जाता है कि बलि में प्रयूक्त पशु की आत्मा धार्मिक कर्मकाण्ड में मरने पर उसे सिधे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। प्राचिन भौतिकवादी दार्शनिक चार्वाक ने हजारों वर्ष पहले ही इस कृत्य पर प्रश्न करते हुये कहा था, “पशुश्चेन्निहतः स्वर्गं ज्योतिष्टोमे गमिष्यति। स्वपिता यजमानेन तत्र कस्मान्न हिंस्यते।।” अर्थात- जो यज्ञ में पशु को मार होम से वह स्वर्ग को जाता हो तो यजमान अपने पितादि को मार…

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खोरठा आलेख : मुरूत सब दिन भांगल गेले हइ, ताव बनवे ले छाड़त नाय लोक!

 : आकाश खूँटी : दुनियाँ में सबले बेसी बुद्ध के मुरूत बनल, आर दुनियाँ में सबले बेसी बुद्ध केरे मुरूत तोड़ल गेल। मुरूत बा मुरति एगो खाली आस्था के चिन्हा नाय हवे बरन बेसी कइर सासक बरगेक आधिपत्येक चिन्हों हवे हे। जहाँ जकर सासने दखल भेलइ ऊ आपन आचार-विचारेक परचारेक माइधमें एगो बोड़ माइधम मुरति बनाइ करल हे। अशोक जइसन हिंसक समराट जखन बौद्ध भइ गेल तखन आपन सासनेक कोना-कोना तक बुद्धेक संदेस आर ओकर चिन्हा बाघ आर धरम चकरी बनाइ छाड़ल। ओर आगुवे ले जैन तिरथंकरेक मुरूत आर गोड़ेक…

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