‘धरोहर’ प्रस्तुति ‘ताजमहल का टेन्डर’ ने दिखाया अफसरसाही की सच्चाईयां

नाटक ताजमहल के टेन्डर ने दिखाया अफसरसाही की सच्चाईयां
धरोहर के स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा के कायल हुए चंद्रपुरा के दर्शक

सत्येन्द्र गिरी/CHANDRAPURA :: शनिवार की रात स्थानीय वेलफेयर सेंटर में सांस्कृतिक संस्था धरोहर ने अजय शुक्ला द्वारा लिखित नाटक ताजमहल का टेन्डर का मंचन किया। नाटक का मुख्य निर्देशन व परिकल्पना यहां संजय कुमार एवं निर्देशन पिंकी एवं विक्रांत कुमार ने किया। स्थानीय कलाकारों ने इस नाटक में विभिन्न किरदारों के रूप में अपनी प्रतिभा को दिखाते हुए दर्शकों की खुब तालियां बटोरी।

नाटक का उदघाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि DVC-CTP के उपमहाप्रबंधक राकेश रंजन पाण्डे ने किया।

संस्था ने इस नाटक के माध्यम से सारी सरकारी मशीनरी, नौकरशाही, छुटभैये नेता किस्म किस्म के घुसखोर और बरसों तक फाइल को दाबे रखनेवाले क्लर्क, छोटे बड़े अफसर के बीच सिस्टम में फैली भ्रष्टाचार की सच्चाई को दिखाया गया है। यह नाटक बताता है कि स्वार्थ की व्यक्तिगत दीवालियों के बीच पसरा वह सार्वजनिक अधंकार जिसे आजादी के बाद के भारत की नौकरशाही ने रचा है।

कहानी का सार
नाटक का आधार यह परिकल्पना है कि मुगल बादशाह शाहजहाॅ इतिहास से निकलकर अचानक इक्कसवीं सदी की दिल्ली पर विराजमान हो जाते है और अपनी बेगम की याद में ताजमहल बनवाने की इच्छा जाहीर करते हैं। सारी सरकारी मशीनरी, नौकरशाही, छुटभैये नेता किस्म किस्म के घुसखोर और बरसों तक फाइल को दाबे रखनेवाले क्लर्क, छोटे बड़े अफसर और गुप्ता जी जिनकी और एक गुप्ता जी जिनकी देखरेख में यह प्रोजेक्ट पुरा होना है, सारे तामझाम के साथ पुरा अमला लगता है और देखते पच्चीस साल गुजर जाते हैं अधेड़ बादशाह बूढ़े होकर बिस्तर से लग जाते हैं और जिस दिन ताजमहल का टेंडर फ्लोट होने जा रहा है दुनिया को विदा कह जाते हैं। नाटक का व्यंग्य हमारे आज के तंत्र पर है।

किरदार निभाने वाले कलाकार
शाहजहाॅ के बेहतरीन किरदार को मनोज कुमार दास व गुप्ता जी की भूमिका को मो0 समीर, सुधीर के भुमिका मे प्रदीप कुमार व भैया जी की भूमिका को विक्रांत पासवान ने निभाया। इसके अलावा दरबारी के रोल में मिताली बोस, लक्ष्मी, निधी कुमारी, शीला चटर्जी, पुष्पा कुमारी, सहित नेता के रोल में उमित गोराय, शर्मा जी व अखबारवाला के रोल में संतोष कुमार, चपरासी के रोल में श्याम कृष्ण, जैसे स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा को प्रस्तुत किया।

संगीत में विक्रांत पासवान, प्रकाश परिकल्पना में गोरांगो व आशिष, वस्त्र सज्जा में कृति कुमारी, मंच सज्जा व रूप सज्जा में मृत्युंजय भौमिक व समीर।

प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नाटक के मंचन में रूपन्द्र ना. सिंह, राजीव कु. तिवारी, दीपक कु. दत्ता, चंचल, पल्लवी लकरा, पूनम, विनोद सिंह, राम कुमार, महेंद्र सिन्हा, अजय सिंह, अरूण कुमार, कंचन, रणविजय व मंजू कुमारी की भूमिका रही।

समीर अखौरी को ‘कला रत्न सम्मान’ 

इसी नाट्य मंचन कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकार समीर अखौरी को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी0वी0सी0 सी0टी0पी0 के उपमहाप्रबंधक राकेश रंजन पाण्डे द्वारा नाट्य क्षेत्र में विशेष योगदान के लिये ‘कला रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

मौके पर श्री अखौरी ने कहा कि इस सम्मान की उम्मीद नही थी। सम्मान पाकर खुशी होती है।

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