बोकारो जिला में ये कैसा पर्यावरण संरक्षण ?

बोकारो :: बोकारो स्टील सिटी में हर दिन सैकड़ों पोधे लगाने के फोटो अखबार और सोशल मीडिया पर दिख रहे हैं। कई सामाजिक संगठन भी पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने के दावे कर रहे हैं। बोकारो का हर एक नागरिक स्वयं को बुद्धिजीवी मानता है। पर पिछले दो महीनों में बोकारो हवाई अड्डे में लगभग 6000 पेड़ काट दिए गए हैं पर किसी ने इसके विरोध में एक शब्द कहा या लिखा नहीं। आंदोलन और विरोध तो बहुत दूर की बात है।

बोकारो के कोआपरेटिव कॉलोनी के एक प्रबुद्ध नागरिक अनिल कुमार गुप्ता ने  चिंता जाहिर करते हुए पूछा है कि एक बोकारो के लिए क्या ज्यादा जरूरी है कुछ मुट्ठीभर लोगो के लिए हवाई यात्रा या लाखों लोगो के लिए शुद्ध हवा? यह भी एक विचारणीय प्रश्न है। क्या हवाई अड्डे में बाकी बचे पेड़ो को बचाने के लिए कोई आगे आने के लिए तैयार है या तापमान के 60 डिग्री पहुंचने का इंतजार रहेगा?

अनिल कुमार गुप्ता ने नागरिक धर्म निभाते हुए बड़ी जिम्मेदारी दिखाई है। बोकारो प्रशासन को इस और ऐसे अनेक प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए।  जहाँ मोदी सरकार पर्यावरण संरक्षण पर देश भर में अभियान चला रही हैं वहां बोकारो में अधिकारी, विधायक आदि सबकुछ तिलांजलि देकर हवाईअड्डा का क्रेडिट लेने की होड़ में लगे हैं और हज़ारो पेड़ इसपर कुर्बान करने को तैयार हैं।  क्या उनके बचाव के लिए राज्य या केंद्र सरकार को आगे आने की आवश्यकता हैं ?

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