बोकारो माॅल में कवि सम्मेलन में बही काव्यरस की फुहार

‘मैं सिंहासन वालों का अभिनंदन गीत नहीं गाता…’

अरुण/BOKARO :: बोकारो माॅल में मंगलवार की शाम गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सत्य, अहिंसा के मार्ग पर चलकर इतिहास रचनेवाले महात्मा गांधी व जय जवान, जय किसान का नारा बुलंद करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिवस पर बोकारो माॅल के तत्वावधान में व सूफी इवेंट के संयोजन में आयोजित इस कवि सम्मेलन में जाने-माने गायक व कवि अरुण पाठक, ब्रजेश पांडेय, डाॅ निरुपमा कुमारी, जाहिद सूफी व आशीष ने देशप्रेम, हिन्दी भाषा, सामाजिकता, हास्य-व्यंग्य व सामयिक परिवेश पर रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अरुण पाठक ने महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाणे रे…’ व अन्य भक्ति व देशप्रेम पर आधारित गीत सुनाकर की। उसके बाद अरुण ने हिन्दी भाषा के महत्त्व पर केंद्रित अपनी रचना ‘हिन्दी है हम सबकी भाषा, हिन्दी है जन-जन की भाषा…’ सुनाकर सबकी तालियां बटोरी। ब्रजेश पांडेय ने ‘मैं सिंहासन वालों का अभिनंदन गीत नहीं गाता…’ व अन्य ओज-पूर्ण रचनाओं को सुनाकर भरपूर प्रशंसा पाई। डाॅ निरुपमा कुमारी ने ‘वीरों सी हंुकार नहीं है, शेरों सी दहाड़ नहीं है..’ व ‘कोई ठंडी हवा जब छू कर गयी, ऐसा लगने लगा ये विरह आग है…’ तथा जाहिद सूफी ने शेरो-शायरी व गज़ल सुनाकर सबकी दाद पाई। इस मौके पर बोकारो माॅल कार्यक्रम आयोजन समिति के सुमित कुमार, प्रीति पांडेय सहित सीतेश आजाद, अनीश कुशवाहा आदि उपस्थित थे।

संबंधित समाचार