अहिंसा और नैतिकता का संदेश दे जैन मुनियों का दल रवाना

शान्ति के लिये ध्यान जरूरी: आलोक मुनि

मुख्यधारा/बोकारो: पूर्णिया (बिहार) के गुलाबबाग से महाराष्ट्र जाने के क्रम में चार दिनों के अपने बोकारो प्रवास के बाद जैन मुनियों का एक विद्वत दल सोमवार को यहां से रवाना हो गया। बोकारो प्रवास के क्रम में उन्होंने चास-बोकारो में अलग-अलग स्थानों पर अपने ओजपूर्ण प्रवचनों के जरिए समाज को अहिंसा, सद्भावना और नैतिकता का संदेश दिया।

रवानगी से पहले अपने उद्बोधन में जैन ऋषि आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य आलोक मुनि जी ने कहा कि आज हमारी आवश्यकतायें अनंत हो गयी हैं। हम जो भी चाहते हैं, वे नहीं मिलती हैं तो हमारे मन में अशांति उत्पन्न होती है। हम उन्हें उलझनों में फंसे रहते हैं। तनाव एवं जीवन में शांति के लिए हमें ध्यान करना चाहिए। इसके बाद दल में शामिल जैन मुनि श्री आलोक कुमार जी सहित श्री हिम कुमार जी एवं श्री लक्ष्य कुमार जी यहां से प्रस्थान कर गये। पारसनाथ से पदयात्रा करते हुए चास बोकारो में चार दिनों के प्रवास पर वह आध्यात्मिक प्रेरणा दे गये। यहां के बाद अब वे रांची होते हुए बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान कर गये। छत्तीसगढ़ से फिर उनकी यात्रा महाराष्ट्र के लिये आगे बढ़ेगी।

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा की ओर से सुरेश बोथरा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि उक्त जैन मुनियों का उपदेश इस यात्रा को लेकर अहिंसा, सद्भावना और नैतिकता का दीपक मानव समाज के बीच जलाना हैस मौके पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष सज्जन जैन, सचिव सुभाष जैन, मदन चैरड़िया, माणिक छल्लानी, जयचंद बांठिया, विनोद चोपड़ा, ललिता चोपड़ा, निकिता, उन्नति आदि मौजूद थे।

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