झारखण्ड में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए 1054 टाॅवर स्थापित करने की योजना है

Mukhyadhara/Bokaro :: गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लोकसभा में झारखण्ड में संचार नेटवर्क कवरेज की स्थिति एवं राज्यों के दूरस्थ वन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क कवरेज में वृद्धि करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में पूछे गये तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में संचार राज्य मंत्री ¼स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने बताया कि संचार नेटवर्क में मूलतः संचार अवसंरचना, कवरेज और टेलीफोन एवं इंटरनेट पहॅुच शामिल है। चूॅकि आॅपरेटरों को सेवा क्षेत्रवार लाइसेन्स प्रदान किए जाते हैं इसलिए आंकड़े क्षेत्रों/जिलावार न होकर सेवा क्षेत्र के अनुसार होता है। बिहार जिसमें झारखण्ड सेवा क्षेत्र भी शामिल है में वर्तमान मेें टाॅवरो की संख्या 3614 एवं बीटीएस की संख्या 10-730 है। वहीं अक्टूबर 2018 के अनुसार 87-70 मिलियन टेलीफोन कनेशन एवं 32-73 मिलियन इंटरनेट कनेक्षन कार्यरत हैं।

मंत्री श्री सिन्हा ने बताया कि विभाग, दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए परियोजनाएॅ कार्यान्वित कर रहा है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल सेवा प्रदान करने के लिए परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसमें झारखण्ड भी शामिल है। प्रथम चरण में गृह मंत्रालय द्वारा पहचान किए गए 2355 टाॅवर स्थलों में से 2341 टाॅवरों को चालू कर दिया गया है, जिसमें झारखण्ड के 816 टाॅवर शामिल है। इसी तरह द्वितीय चरण में झारखण्ड में 1054 टाॅवर स्थापित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि झारखण्ड में 16@12@2018 की स्थिति के अनुसार कुल 2544 ग्राम पंचायतों को आॅप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा गया है, जिसमें 2312 ग्राम पंचायतों में सेवा बहाल कर दी गयी है।

वहीं गिरिडीह सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय के द्वारा लोकसभा में देश के विभिन्न भागों में सांस्कृतिक केन्द्रों के निर्माण करने के विचार एवं रबिन्द्रनाथ सांस्कृतिक केन्द्र शुरू करने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में पूछे गये अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ महेश शर्मा ने बताया कि मंत्रालय देश के विभिन्न भागों में टैगोर सांस्कृतिक परिसरों के निर्माण हेतु राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्रों, केन्द्रीय/राज्य सरकार की एजेंसियों/निकायों, विष्वविद्यालयों, नगर निगमों, प्रतिश्ठित गैर-लाभ-अर्जक संगठनों आदि को केन्द्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करता है। साथ ही सांस्कृतिक अवसंरचना के सृजन हेतू वित्तीय सहायता स्कीम के अंतर्गत ‘‘टैगोर सांस्कृतिक परिसर के लिए वित्तीय सहायता‘‘ नामक केन्द्रीय क्षेत्रक स्कीम घटक संचालित करता है।

मंत्री श्री  शर्मा ने बताया कि स्कीम के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों के अंतर्गत किसी भी परियोजना को पूरा करने के लिए परियोजना से संबंधित निर्माण कार्य की अनुमति प्रदान किये जाने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसे पूरा किया जाना अपेक्षित होता है।

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