लोकतंत्र के चैथे खंभे पर, है आज जिम्मेदारी भारी…

Mukhyadhara/Bokaro :: नव वर्ष के आगमन के बाद प्रखर साहित्यिक संस्था ‘साहित्यलोक’ की पहली मासिक रचनागोष्ठी बीती शाम सेक्टर 2 बी में साहित्यकार उदय कुमार झा के आवास पर बलराम चैधरी की अध्यक्षता में हुई। साहित्यलोक के संस्थापक महासचिव तुलानन्द मिश्र के संचालन में आयोजित इस रचनागोष्ठी में मिथिला सांस्कृतिक परिषद् के महासचिव राजेन्द्र कुमार, पूर्व सचिव मोहन झा, साहित्यकार सतीष चंद्र झा, हरिमोहन झा, अमीरीनाथ झा ‘अमर’, उदय कुमार झा, अरुण पाठक, नीलम झा, राकेश कुमार, अमन कुमार झा, राजीव कंठ, कृष्ण कुमार झा, संजय कुमार झा, एस चैधरी व विभूति कुमार शामिल हुए।

रचनागोष्ठी की शुरुआत नवोदित कवयित्री नीलम झा ने अपनी मैथिली कविता ‘पिता’ व ‘फेसबुक’ सुनाकर की। अरुण पाठक ने पत्रकारिता के दायित्व पर केंद्रित अपनी ‘पत्रकारिता’ शीर्षक हिन्दी कविता सुनाकर सबकी प्रशंसा पाई- ‘लोकतंत्र के चैथे खंभे पर, है आज जिम्मेदारी भारी/जनमानस की बात को रखे, लोकतंत्र की करे पहरेदारी’। युवा कवि राकेश कुमार ने ‘दाता’ व ‘मित्र’, अमन कुमार झा ने मैथिली कहानी ‘कटु सत्य’, उदय कुमार झा ने ‘कर्म हमर’, अमन कुमार मिश्र ने ‘जिंदगी मेरी है रंगोली’, सतीष चंद्र झा ने लघुकथा ‘सत्यकथा’, विजय शंकर मल्लिक ने ‘लालदासक जयंती’ व ‘गीत गाते चलो’, अमीरी नाथ झा ‘अमर’ ने नुआक रंग’ शीर्षक रचना का पाठ किया। आॅनलाईन मोबाइल के माध्यम से साहित्यलोक के पूर्व महासचिव गिरिजानन्द झा ‘अर्धनारीश्वर’ ने ‘खंजन’ व भारतीय वन सेवा के अधिकारी व साहित्यकार कुमार मनीष अरविन्द ने ‘विद्यापति’ शीर्षक रचना सुनाकर सबको प्रभावित किया।

पठित रचनाओं पर अध्यक्ष बलराम चैधरी, तुलानन्द मिश्र, विजय शंकर मल्लिक, अमीरी नाथ झा ‘अमर’, नीलम झा, विभूति कुमार आदि ने समीक्षा टिप्पणी दी। अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री चैधरी ने कहा कि बोकारो की साहित्यिक प्रतिभा को आगे बढ़ाने में साहित्यलोक की भूमिका प्रशंसनीय है। बोकारो में विगत 26 वर्ष पूर्व गठित ‘साहित्यलोक’ निरंतर अपनी गतिविधियों के माध्यम से साहित्यक उत्थान के लिए प्रयत्नशील है जो बहुत ही प्रशंसनीय व अनुकरणीय है।

संबंधित समाचार