ठेठ खोरठा कवि संतोष कुमार महतो : आइज जिनखर पुइन तिधि लागइ

गिरिधारी गोस्वामी/BOKARO ::

खोरठा भासाँइ सहज सुबोध आर ठेठ सबदें जेरंग संतोष बाबुक कविता हे से रकम आर दोसर के नाय देखाय। सहज, सुबोध रगँवारूपन! जकर सें बुझाय जे एगो गाँवेक साधारन चासा लोक आपन मनेक बात आपन आस-पासेक बात सुनाय रहल हे। ’एक मउनि फूल’ केर कवितवइन पढ़लें ई बात साफ भइ जा हे जे ऊ कवि बने खातिर कोन्हों संघर्ष नाय करल हथ ने कोन्हों खास विचार घाराक पोसक हला, ने पिछलगुआ। जहाँ आपन कविता ’हर-हरिक मिलन’ में पौरानिक पात्र के लइ बेस फिंगाठी लिखल हथ उहीं उनखर आपन धार्मिक आस्थाक चिन्हा देखल जा हे जखन ’कलजुगें हरिनाम’ नामें खोरठा परचा में पारंपरिक रूढ़ीवादी कर्मकाण्ड में परचार कर-हथ। संतोष बाबु बेस चासाक बेटा हलथ आर हाईस्कुलेक मास्टरी सें सेवानिवृत भेल बाद चास-वासीं व्यस्त रहला, एते व्यस्त की साहित लेखनों खातिर समय नाय बहरवे पारला से लेल आपन सेवानिवृति बछर 1990 में छपल उनखर दोसर किताब संपादित खोरठा कविता संग्रह ’एक पथिया डोंगल महुआ’ के तेइस बछर बादो आर तेसर किताब नाय लिखे पारला।

संतोष बाबु! माने संतोष कुमार महतो जीक जनम बोकारो जिलाक गांगजोरी गांवें एगो बेस चासा कुम्हार परिवारें 03 सितम्बर,1930 के भेल हलइ। इनखर मायेक नाम छुटुमनी आर बाप हला तालो महतो जी। पाथुरिया मिडिल स्कुल सें मिडिल आर गोला हाईस्कुल सें मेटरिक पास करल बाद राँची काॅलेज सें एम0ए0(भूगोल) तक के डिगरी लेला, तकर बाद डिप0इन एड0 कइर पूंडरू हाईस्कुल सें मास्टरी सुरू करला। बांधडीह, योगदा सत्संग (राँची),चास, बोकारो थर्मल, डी0वी0सी0 चंद्रपूरा इंटर काॅलेज में आई सेवानिवृत भेला।

खोरठा साहितें आठवीं दसकें बोकारो छेतरें खोरठा लिखवइया सब अगुवइला। एहे लेताइरें संतोष बाबु ए0के0झा जी सें प्रेरित भइ खोरठा कविता लिखे लागला आर 1986 में उनखर आपन खोरठा कविता संग्रह ’एक मउनी फूल’ छपलइ। संगे-संग दोसर-दोसर कविक माझें से मांगल-चोंगल खोरठा कविता संकलन ’एक पथिया डोंगल महुआ’ से संकलन-संपादन कइर छपवला।

उनखर एगो बिसेसते देखल गेल जे ऊ कविता पाठ सहज भावें कर-हला बिना देखल, तकर छाड़ा उनखर सुकुमार जीक एगो कविता खुबे पसिंद हलइ सेटा ऊ जखर-तखर सुनवतला,’ पिंछ कें बेल बटन नुन, बेंग नियर फुइल गेल’।

आपन गांवें आपन अगुवाइ में कइएक खोरठा कवि सम्मेलनो करवला। उनखर छपल हइ तो दुइये गो खोरठा किताब, जेटा खोरठा पाठ्यक्रमें सामिल हे, मेंतुक बिसेसता हे जे इनखर दुइयो किताब के तीन-तीन संस्करण छइप चुकल हे, जे एगो किरतिमान हे। उनखर खोरठा सहित सेवा खातिर 1992 में बोकारो खोरठा कमिटी बाट ले ’श्रीनिवास पानुरी स्मृति साहित्य सम्मान’ से सम्मानित करल गेलइ।

आपन भरल-पूरल परिवार छाइड़ 24 नवम्बर 2013 के सिराइ गेला।

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