‘ऊँ महाभारत’ महाकाव्य के रचयिता बुद्धिनाथ झा को परिषद् ने किया सम्मानित

अरुण पाठक/बोकारो :: मैथिली भाषियों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद्, बोकारो द्वारा मंगलवार की शाम राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त साहित्यकार व सद्यः प्रकाशित मैथिली महाकाव्य ‘ऊँ महाभारत’ के रचयिता बुद्धिनाथ झा को उनके चीरा चास स्थित आवास पर सम्मानित किया गया। श्री झा को गुलदस्ता, पाग व शाॅल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर परिषद् के महासचिव राजेन्द्र कुमार, सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक, पूर्व महासचिव हरिमोहन झा, मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के सचिव रविन्द्र झा, सहित पी के झा ‘चंदन’, शंभु झा, सुनील मोहन ठाकुर, रामबाबू चैधरी, मनोज झा, विश्वनाथ झा आदि उपस्थित थे।

परिषद् के महासचिव राजेन्द्र कुमार ने कहा कि मैथिली भाषा में ऊँ महाभारत महाकाव्य का सृजन कर श्री बुद्धिनाथ झा ने ऐतिहासिक कार्य किया है। यह बोकारो ही नहीं अपितु पूरे मिथिलांचल के लिए गौरव की बात है। श्री झा साहित्य सृजन के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी सदैव सक्रिय रहे हैं। साहित्य जगत के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी इनका योगदान प्रशंसनीय है।

पूर्व महासचिव हरिमोहन झा ने कहा कि बुद्धिनाथ झा की रचना व तीन खंडों में प्रकाशित यह महाकाव्य मैथिली भाषा में है लेकिन पूरे साहित्य जगत के लिए यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है। अरुण पाठक ने कहा कि मैथिली साहित्य में महाभारत की कमी को पूरा कर श्री झा ने बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य किया है इसके लिए साहित्य जगत उनका हमेशा ऋणी रहेगा। एक सशक्त साहित्यकार होने के साथ ही श्री झा एक प्रसिद्ध मंच संचालक व रंगमंच के सशक्त अभिनेता के रुप में भी चर्चित रहे हैं।

साहित्यकार श्री झा ने तीन खंडों में प्रकाशित ‘ऊँ महाभारत’ महाकाव्य के सृजन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस महाकाव्य के सृजन में उन्हें 9 वर्ष लगे हैं। यह महाभारत का अनुवाद नहीं है अपितु महाभारत की कथा को अपने ढंग से उन्होंने मैथिली में पद्य में प्रस्तुत किया है। मैथिली में महाभारत महाकाव्य रचना की कमी वर्षों से महसूस की जा रही थी। उन्हें इस बात की खुशी है कि मैथिली साहित्य जगत के लिए इस महत्वपूर्ण महाकाव्य सृजन कार्य को उन्होंने अंजाम दिया और यह महाकाव्य पाठकों को आकर्षित कर रहा है।

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