चन्द्रपुरा में ‘धरोहर’ की “सुमंगली” ने दर्शकों को रुला-सा दिया


झारखण्ड की जानी-मानी सांस्कृतिक संस्था ‘धरोहर’ के कलाकारों ने एक और सफल नाट्य प्रस्तुति दी है जो भावुकता से परिपूर्ण रही और अपने दर्शकों को रुला-सा दिया.

सांस्कृतिक संस्था ‘धरोहर’ ने गत मंगलवार (30.01.2018) की रात चन्द्रपुरा (बोकारो ) के स्थानीय वेलफेयर सेंटर में “सुमंगली” नामक नाटक का सफल मंचन किया. चंद्रपुरा की साहित्यकार व डीवीसी की रिटायर शिक्षिका कावेरी जी द्वारा लिखित कहानी ‘सुमंगली’ पर आधारित इस नाटक का निर्देशन संजय कुमार ने किया.

कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय प्रशिक्षु डीएसपी आलोक रंजन ने किया। इस नाटक में स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का भरपूर जलवा दिखाया.

कहानी में एक महिला के शोषण व उत्पीड़न को भावुकता के साथ दिखाया गया है. यह कहानी स्त्रियों पर जोर-ओ-जुल्म, प्रताड़ना और शोषण को उदघाटित करती है. नाटक में ‘सुगिया’ के बेहतरीन किरदार को पिंकी कुमारी तथा ‘ठेकेदार’ की भूमिका को मनोज कुमार दास ने जीवंत कर दिया.

साथ ही ‘मंगरा‘ के रोल में विक्रांत, ‘दुखना‘ के रोल में प्रदीप कुमार, ‘ललिया‘ के रोल में शीला कुमारी, ‘बुधनी‘ के रोल में मिताली बोस, ‘फुलवा‘ के रोल में निधि कुमारी और ‘मौसी‘ के रोल में पुष्पा कुमारी ने अपनी प्रतिभाओं को बेहतर रूप से दर्शाया. इसके अलावा श्यामकृष्ण, लक्ष्मी कुमारी, अजय कुमार, कृष्णा कुमार, उमित कुमार, सागर कुमार, मो. समीर के रोल को भी पसंद किया गया.

नेपथ्य से नाटक के मंचन में आशीष चक्रवर्ती, गोरांगो चोधरी, रणविजय सिंह, डेन सिक्वेरा, बिरजू, चंचल, काजल, अजय, पल्लवी, रौली,पनम कुमारी, बिनोद सिंह, अशोक सिंह, रूपेंद्र, पप्पु आदि का समुचित योगदान रहा.

मंचन का रूप एवं मंच सज्जा बेहतर था जिसे मृत्युंजय भौमिक ने डेकोरेट किया. वस्त्र सज्जा व नृत्य में कृति कुमारी ने अपनी प्रतिभा को दिखाया. प्रकाश परिकल्पना को आशीष चक्रवर्ती ने आकर्षक बनाया. पूरे कार्यक्रम को चंद्रपुरा के सुधि दर्शकों ने ना ही सिर्फ सराहा बल्कि आगे भी इस तरह का आयोजन हो इसके लिये टीम को उत्साहित किया.


‘सुमंगली’ कहानी का सार :

12 वर्ष की अनाथ सुगिया जो ठेकेदार के बिल्डिंग में पिछले पांच वर्षों से काम करती है और मजदूरों के साथ हीं रहती है. ठेकेदार सुगिया पर खुब पैसा लूटाता है तथा एक दिन अपनी हवस का शिकार बनाता है. जब सुगिया बिन ब्याही मां बनने वाली होती है तो बदनामी से बचने के लिये सुगिया की शादी दुखना से करवा दी जाती है. एक दिन दुखना की भी मौत हो जाती है. इधर सुगिया का बच्चा बिमार हो जाता है तो उसे बचाने के लिये वह पैसों की जुगाड़ के लिये ठेकेदार के पास पहुंच जाती है. ठेकेदार फिर उसे अपने हवस का शिकार बनाता है. बिमारी से सुगिया के बच्चे की मौत हो जाती है इससे सुगिया टूट जाती है. उधर ठेकेदार के पूरे परिवार की दुर्घटना में मौत हो जाती है केवल एक 12 वर्ष की उसकी छोटी बेटी बच जाती है. जिसे यही सुगिया रखती है.

कहानीकार की रचनायें कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है :

कहानी ‘सुमंगली’ की लेखिका कावेरी हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्व लेखिका है जिनकी रचनायें कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है. सुमंगली कहानी इंदिरा गांधी खुला विश्वविद्यालय, लखनउ विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय वर्धा, मेघालय विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है. इस कहानी पर कर्नाटक के शैलजा राय, लखनऊ की प्रतिभा सरोज, हैदराबाद के शांति ससमल, वर्धा की भावना माती, मेघालय के कुलदीप सिंह, गुरूघासी के रमोला भटनागर शोध कर चुकें है. श्रीमति काबेरी कहानी के संबंध में कहती है कि जीवन संघर्ष में लीन अपने कर्मपथ पर बदहवास दौड़ती नारी जिसे पुरस्कार की जगह घनघोर उत्पीड़न हीं मिला है. उनके अनुसार इस कहानी की प्रासंगिकता आज भी मौजूद है. वे कहती है कि एक मजदूर मां हां या पढ़ी लिखी सभ्य मां दोनों के पलड़े बराबर है. आज सुमंगली के रूप में विकसित नारी है जो आज स्वच्छंदता के नाम पर दुनियां के चकाचैंध में विदेश जाकर पर कटे चिड़ियां की भांति अस्मिता को बचाने में असफल है. उसकी दशा एक अनपढ़ मजदूर औरत से भी बदतर है. इस्तेमाल की वस्तु नहीं है नारियां. वे कहती है कि महिला पुरूष के योगदान से हीं स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है।

मंचन से ठीक पहले क्या कहते  हैं ‘सुमंगली’ नाटक के  निर्देशक संजय कुमार ?

निर्देशक संजय कुमार 

सर्वप्रथम सहृदय धन्यवाद है परम आदरनीय श्रीमति कावेरी जी का जिन्होने अपनी रचना ‘‘सुमंगली’’ पर नाट्यलेख व नाट्यमंचन हेतु मुझे अवसर प्रदान किया। यह मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है। दो वर्षों के अथक प्रयास के बाद नाट्यलेख तैयार हुआ व 45 दिनों की सशक्त कार्यशाला व अभ्यास के बाद प्रस्तुति को तैयार है यह हिन्दी नाटक ‘‘सुमंगली’’। साथ ही सहृदय धन्यवाद है मेरे गुरू श्री संजीव श्रीवास्तव का जिन्होने कार्यशाला में कलाकारों को नाट्य प्रशिक्षण देने में अपना अहम योगदान दिया। कहानी को नाट्य रूप देने में इसकी मूलवस्तु से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन प्रस्तुति हेतु कई कल्पनीय चीजों का सहारा लिया गया है तथा नये पात्र, स्थान, गीत, संगीत, संवाद और कहानी का अन्त है। हमारा प्रयास है इस नाटक को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाए। अतः यह प्रस्तुति राष्ट्रीय स्तर की तैयार करने का प्रयास किया गया है। आशा है आज के तमाम दर्शकों को बेहद पसंद आएगी। एक बात और हम पहली बार अपने नाटक में पपेट (कठपुतली नृत्य) का प्रयोग कर रहे हैं। कैसा लगा, जरूर बताईएगा।

‘सुमंगली’ नाटक का अगला मंचन :

इस नाटक के सफल मंचन के बाद नाटक के निर्देशक संजय कुमार ने मुख्यधारा प्रतिनिधि को बताया कि जनता द्वारा इस मंचन की पुरजोर सराहना, पुनर्मंचन की मांग व स्वागत को देखते हुए हमारी संस्था ने तत्काल घोषणा की है कि नाटक ‘सुमंगली’ का पुनर्मंचन मार्च माह में ही किया जाएगा व तिथि की घोषणा कुछ दिवस बाद की जाएगी।

 

 

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